Wednesday, August 17, 2011

लोकपाल और जन लोकपाल बिल का फर्क सभी को समझाएं - Difference between Jokpal and Jan Lokpal bill

हमारे देश की संसद में जब कोई बिल आता है तो बहस के बाद जब वो पास हो जाता है तो कानून बन जाता है . फिर चाहे सही हो या गलत वो कानून हमको मानना ही पड़ेगा . जी हाँ अगर वो गलत है तो भी मानना पड़ता है
एक उदहारण से समझते हैं
१) हमारे देश में गाय को  माँ के समान समझा जाता रहा है और पूजा की जाती है . लेकिन  देश में अंग्रेज आये और गोहत्या का कानून बना दिया . और जगह जगह गाय के कतल खाने बना दिए . हर रोज देश में हजारो गाय कटती है लेकिन हम कुछ नहीं कर सकते क्योंकि ये तो कानून बन चूका है .
२) अंग्रेजो ने देश में शराब के लाईसेंस देकर शराब को बेचना और बनाना क़ानूनी रूप से जायज बना दिया . शराब पीना व् बेचना अब गलत नहीं माना जाता क्योंकि अब ये कानून बन चूका है ,

इसी प्रकार एक और बेकार कानून हमारे देश की सरकार बनाने जा रही है जिसका नाम है लोकपाल बिल .
बहुत से लोग इसको "जोकपाल " बिल भी कहते हैं क्योंकि बनाया तो जा रहा है ये भ्रस्टाचार मिटाने के लिए लेकिन असल में ये भ्रस्टाचार को बढाने का और भ्रस्टाचारियों की मदद करने का काम करेगा . 
आईये समझते हैं कैसे .

1) इस बिल के अनुसार अगर आप किसी भ्रस्टाचार के खिलाफ शिकायत करते हैं और वो सरकारी अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसको 6 महीने की सजा मिलेगी लेकिन अगर आपकी शिकायत गलत पाई जाती है तो शिकायत करने वाले को २ साल की  सजा मिलेगी . अगर ये बिल पास हुआ तो लोग भ्रस्टाचार के खिलाफ शिकायत करने से भी डरेंगे .

2) केस लड़ने के लिए सरकारी अफसर को मुफ्त का सरकारी वकील भी मिलेगा लेकिन आप को वकील की फीस आपनी जेब से देनी पड़ेगी .

3)  रोजमर्रा के काम आने वाले विभाग की जाँच नहीं  : आम आदमी के रोजमर्रा के काम आने वाले विभाग जैसे पुलिस , राशन , शिक्षा , सड़क , उद्योग , पंचायत ,  नगरपालिका , वन , सिंचाई , लाईसेंस,रोडवेज विभाग  में अगर कोई भ्रस्टाचार होता है तो उसकी जाँच लोकपाल नहीं करेगा .  तो फिर किसकी जाँच करेगा ? फिर आम आदमी को क्या फायदा हुआ

4) सांसदों की जाँच का अधिकार नहीं  : कोई  सांसद अगर भ्रस्टाचार करता है तो उसके खिलाफ लोकपाल को जाँच का अधिकार नहीं है . इस देश में सबसे बेईमान नेता ही है और उनकी ही जाँच का अधिकार नहीं होगा तो भ्रस्टाचार कैसे मिटेगा . लेकिन NGO, मार्केट/ रेजिडेंट वेल्फयेर असोसीयेसन , रामलीला/ मुहर्रम/ दुर्गा पूजा  आदि आयोजित करने वाली संस्थाए इसकी जाँच के दायरे में रहेंगी .  

5) प्रधान मंत्री की जाँच  सीबीआई द्वारा ही होगी : जो जांच एजेंसी (CBI) प्रधान मंत्री के अधीन आती है वो कैसे बिना दबाव के प्रधानमंत्री की जाँच कर सकती है  . 

इन कमियों को देखते हुआ अन्ना हजारे जी ने एक और बिल बनाया है जिसका नाम है जन लोकपाल बिल जिसमें उन्होंने कुछ सुझाव दिए है

6) पैसे की वसूली :  अगर कोई कलमाड़ी या ऐ  राजा भ्रस्टाचार करके देश का पैसा लूट लेता है तो  उससे लूटे हुए पैसे को वसूल करने का कोई कानून नहीं है वो 2-4 साल की सजा काट कर मजे से उस पैसे को खा सकता है . जन लोकपाल बिल में भ्रस्टाचार करने वालो से पूरा पैसा वसूल करने का प्रावधान है . वो पैसा वापस नहीं देता तो उसकी संपत्ति कुर्क करके पैसा वसूल करने का प्रावधान है .

7) सिटिज़न चार्टर : अन्ना हजारे का जन लोकपाल बिल सिटिज़न चार्टर की बात करता है जिस में लिखा होगा की  उधारहण  के लिए अगर आपको लाईसेंस बनवाना है तो वो कितने दिन में बन जाना चाहिये और कोन सा अधिकारी इसको बनाएगा . और अगर उसने उस समय  सीमा में आपका काम नहीं किया तो उस अधिकारी के वेतन से पैसे काट कर पीड़ित व्यक्ति को मुवावजे के रूप में दिए जायेगा

अन्ना हजारे का जन लोकपाल अगर लागु नहीं हुआ तो क्या होगा :
1) भ्रस्टाचार और भी ज्यादा तेजी से बढेगा
2) महंगाई बढ़ने का असली कारण भ्रस्टाचार ही है इसलिए महंगाई भी तेजी से बढ़ेगी
3) बेवजह की 2 साल की सजा के डर  से कोई भी भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज नहीं उठाने की हिम्मत नहीं कर पायगा

जन लोकपाल की ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे ( ३ पेज का परचा हिंदी में  )